भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
India’s Nuclear Submarine Triad: INS Arihant, Arighat & Aridhaman Strengthen Sea-Based Deterrence and Second-Strike Capability
समुद्र की निस्तब्ध गहराइयों में भारत का रणनीतिक संतुलन परमाणु पनडुब्बी त्रयी और विश्वसनीय प्रतिरोध की राजनीति हिंद महासागर की शांत सतह के नीचे एक ऐसी शक्ति सक्रिय है, जो दिखाई नहीं देती, परंतु जिसकी उपस्थिति ही रणनीतिक संतुलन को परिभाषित करती है। भारत की परमाणु पनडुब्बी क्षमता—विशेषकर INS Arihant, INS Arighat और शीघ्र शामिल होने वाली INS Aridhaman—आज राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना का वह स्तंभ है, जो प्रत्यक्ष आक्रामकता नहीं, बल्कि मौन निरोध (Silent Deterrence) का प्रतीक है। भारत की परमाणु त्रयी का समुद्री आयाम, रणनीतिक स्थिरता के उस सिद्धांत पर आधारित है जिसमें शक्ति का उद्देश्य युद्ध करना नहीं, बल्कि युद्ध को रोकना होता है। परमाणु त्रयी का अर्थ: सिद्धांत से व्यवहार तक भारत की परमाणु नीति दो मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है— नो फर्स्ट यूज (No First Use) न्यूनतम विश्वसनीय निरोध (Credible Minimum Deterrence) इन सिद्धांतों की विश्वसनीयता तभी संभव है जब “दूसरे प्रहार की क्षमता” (Second Strike Capability) सुनिश्चित हो। यदि शत्रु प्रथम आक्रमण में भूमि आधारित मिसाइल अड्डों या वायु ठिकानों ...