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भारत-चीन कूटनीति: ब्रिक्स (BRICS) से पहले सीमा वार्ता क्यों है इतनी महत्वपूर्ण 1. परिचय: शिखर सम्मेलन से पहले की उच्च-जोखिम वाली शांति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बीजिंग आगमन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उल्टी गिनती का एक साथ होना कोई कूटनीतिक इत्तेफाक नहीं है; यह तनाव कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है। भले ही आगामी शिखर सम्मेलन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित उपस्थिति के साथ वैश्विक सुर्खियों में रहेगा, लेकिन बीजिंग में एक "शैडो समिट" (पर्दे के पीछे की बातचीत) पहले से ही जारी है। भारतीय और चीनी वार्ताकारों के बीच यह उच्च स्तरीय बातचीत वैश्विक कैमरों के सामने आने से पहले दुनिया के सबसे अस्थिर द्विपक्षीय संबंधों को संभालने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 2. "प्री-समिट" रणनीतिक संरेखण NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी का मिशन स्पष्ट है: वे उस नींव के निर्माता हैं जो शिखर सम्मेलन को द्विपक्षीय तनाव से बचाने का काम करेगी। उच्च-स्तरीय कूटनीति में बहुपक्षीय सफलता के लिए रणनीतिक तैयारी पहली शर्त होती है। बीजिंग में जारी बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्...